बटनों सी बिंदी
कमानों सा काजल
होंठों की संकरी खाई से निकलता धुआं
चौन्ध्नी सी लौ आँखों के घर में
रुई के फाहों सी मुलायमियत एडियों के गोलों में
सब कुछ तो है तुम्हारे पास
फिर भी तो मै तुमसे प्यार नहीं करता
कमानों सा काजल
होंठों की संकरी खाई से निकलता धुआं
चौन्ध्नी सी लौ आँखों के घर में
रुई के फाहों सी मुलायमियत एडियों के गोलों में
सब कुछ तो है तुम्हारे पास
फिर भी तो मै तुमसे प्यार नहीं करता
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