google +
Search results
Sunday, December 23, 2012
ये मै हूँ
तुम्हारी बातें किसी मंझे हुए लेखक की तरह हैं, जो की किसी निहायत ही भोले और मासूम इंसान के जज्बातों के अंदर घुस के उसके अंदर के षड़यंत्र को भी निकाल लेता है.....जबकि हम जानते हैं की मासूमियत षड्यंत्रकारी नहीं होती...
Posted by
ANKITA GUPTA
at
7:12 PM
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment