तब जब सब समझ में आता था
या नहीं आता था
तब शांत रहती थी
और महसूस करती थी
वो था मेरा बचपन
अब यहाँ से वहां छलांगे मारती हूँ
उछलती हूँ
हंसती हूँ
खिलखिलाती हूँ
मुस्कुराती हूँ
और आगे निकल जाती हूँ
पर कुछ समझ नहीं आता
या नहीं आता था
तब शांत रहती थी
और महसूस करती थी
वो था मेरा बचपन
अब यहाँ से वहां छलांगे मारती हूँ
उछलती हूँ
हंसती हूँ
खिलखिलाती हूँ
मुस्कुराती हूँ
और आगे निकल जाती हूँ
पर कुछ समझ नहीं आता