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Wednesday, April 6, 2016

हलचल

तब जब सब समझ में आता  था
या नहीं आता था
तब शांत रहती थी
और महसूस करती थी
वो था मेरा बचपन


अब यहाँ से वहां छलांगे  मारती हूँ
उछलती हूँ
हंसती हूँ
खिलखिलाती हूँ
मुस्कुराती हूँ
और आगे निकल जाती हूँ
पर कुछ समझ नहीं आता