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Thursday, September 6, 2018
Wednesday, April 6, 2016
हलचल
तब जब सब समझ में आता था
या नहीं आता था
तब शांत रहती थी
और महसूस करती थी
वो था मेरा बचपन
अब यहाँ से वहां छलांगे मारती हूँ
उछलती हूँ
हंसती हूँ
खिलखिलाती हूँ
मुस्कुराती हूँ
और आगे निकल जाती हूँ
पर कुछ समझ नहीं आता
या नहीं आता था
तब शांत रहती थी
और महसूस करती थी
वो था मेरा बचपन
अब यहाँ से वहां छलांगे मारती हूँ
उछलती हूँ
हंसती हूँ
खिलखिलाती हूँ
मुस्कुराती हूँ
और आगे निकल जाती हूँ
पर कुछ समझ नहीं आता
Saturday, August 15, 2015
सपना अभी भी -
एक अकेलेपन से दूसरे अकेलेपन
में पहुँचते हुए मैं हर बार प्यार में से गुज़रा हूँ
एक गहरा छायादार रास्ता धीरे धीरे रेगिस्तान की पगडण्डी
में बदलता हुआ जिस पर आगे बढ़ना मुश्किल है, पीछे लौटना
असंभव, वो रास्ता जो हर रात मेरे सपने में से गुजरता
हुआ सुबह की पराजित ऊब में फिर उठ खड़ा होता है चलने के लिए
लेकिन कहाँ
सब कुछ है यहाँ - वही नम कांपते होंठो पर भटकती उंगलियां
और अस्फुट फूटते शब्द
और टूटते सांसो की गरम आंच और ये अहसास'
कि दरवाज़े के बहार छोड़ आया था जिसे,
खिड़की से झाँकने लगा है वही अकेलापन
कि प्यार सिर्फ इक टूटती गिरी ईमारत में खड़ा
एक साबित द्वार है जिसे धड़कते दिल से खोलकर हम सूनेपन से
सूनेपन में पहुँचते हैं.
में पहुँचते हुए मैं हर बार प्यार में से गुज़रा हूँ
एक गहरा छायादार रास्ता धीरे धीरे रेगिस्तान की पगडण्डी
में बदलता हुआ जिस पर आगे बढ़ना मुश्किल है, पीछे लौटना
असंभव, वो रास्ता जो हर रात मेरे सपने में से गुजरता
हुआ सुबह की पराजित ऊब में फिर उठ खड़ा होता है चलने के लिए
लेकिन कहाँ
सब कुछ है यहाँ - वही नम कांपते होंठो पर भटकती उंगलियां
और अस्फुट फूटते शब्द
और टूटते सांसो की गरम आंच और ये अहसास'
कि दरवाज़े के बहार छोड़ आया था जिसे,
खिड़की से झाँकने लगा है वही अकेलापन
कि प्यार सिर्फ इक टूटती गिरी ईमारत में खड़ा
एक साबित द्वार है जिसे धड़कते दिल से खोलकर हम सूनेपन से
सूनेपन में पहुँचते हैं.
धर्मवीर भारती
Tuesday, July 28, 2015
चीथड़े में हिन्दुस्तान / दुष्यंत कुमार
एक गुडिया की कई कठपुतलियों में जान है,
आज शायर ये तमाशा देख कर हैरान है।
ख़ास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिए,
यह हमारे वक्त की सबसे सही पहचान है।
एक बूढा आदमी है मुल्क में या यों कहो,
इस अँधेरी कोठारी में एक रौशनदान है।
मस्लहत-आमेज़ होते हैं सियासत के कदम,
तू न समझेगा सियासत, तू अभी नादान है।
इस कदर पाबंदी-ए-मज़हब की सदके आपके
जब से आज़ादी मिली है, मुल्क में रमजान है।
कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
मैंने पूछा नाम तो बोला की हिन्दुस्तान है।
मुझमें रहते हैं करोड़ों लोग चुप कैसे रहूँ,
हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है।
बोल! अरी, ओ धरती बोल! / मजाज़ लखनवी
बोल ! अरी, ओ धरती बोल !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
बादल, बिजली, रैन अंधियारी, दुख की मारी परजा सारी
बूढ़े, बच्चे सब दुखिया हैं, दुखिया नर हैं, दुखिया नारी
बस्ती-बस्ती लूट मची है, सब बनिये हैं सब व्यापारी बोल !
अरी, ओ धरती बोल ! !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
कलजुग में जग के रखवाले चांदी वाले सोने वाले
देसी हों या परदेसी हों, नीले पीले गोरे काले
मक्खी भुनगे भिन-भिन करते ढूंढे हैं मकड़ी के जाले
बोल ! अरी, ओ धरती बोल !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
क्या अफरंगी, क्या तातारी, आँख बची और बरछी मारी
कब तक जनता की बेचैनी, कब तक जनता की बेज़ारी
कब तक सरमाए के धंधे, कब तक यह सरमायादारी
बोल ! अरी, ओ धरती बोल !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
नामी और मशहूर नहीं हम, लेकिन क्या मज़दूर नहीं हम
धोखा और मज़दूरों को दें, ऐसे तो मजबूर नहीं हम
मंज़िल अपने पाँव के नीचे, मंज़िल से अब दूर नहीं हम
बोल ! अरी, ओ धरती बोल !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
बोल कि तेरी खिदमत की है, बोल कि तेरा काम किया है
बोल कि तेरे फल खाये हैं, बोल कि तेरा दूध पिया है
बोल कि हमने हश्र उठाया, बोल कि हमसे हश्र उठा है
बोल कि हमसे जागी दुनिया
बोल कि हमसे जागी धरती
बोल ! अरी, ओ धरती बोल !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
राज सिंहासन डाँवाडोल!
बादल, बिजली, रैन अंधियारी, दुख की मारी परजा सारी
बूढ़े, बच्चे सब दुखिया हैं, दुखिया नर हैं, दुखिया नारी
बस्ती-बस्ती लूट मची है, सब बनिये हैं सब व्यापारी बोल !
अरी, ओ धरती बोल ! !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
कलजुग में जग के रखवाले चांदी वाले सोने वाले
देसी हों या परदेसी हों, नीले पीले गोरे काले
मक्खी भुनगे भिन-भिन करते ढूंढे हैं मकड़ी के जाले
बोल ! अरी, ओ धरती बोल !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
क्या अफरंगी, क्या तातारी, आँख बची और बरछी मारी
कब तक जनता की बेचैनी, कब तक जनता की बेज़ारी
कब तक सरमाए के धंधे, कब तक यह सरमायादारी
बोल ! अरी, ओ धरती बोल !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
नामी और मशहूर नहीं हम, लेकिन क्या मज़दूर नहीं हम
धोखा और मज़दूरों को दें, ऐसे तो मजबूर नहीं हम
मंज़िल अपने पाँव के नीचे, मंज़िल से अब दूर नहीं हम
बोल ! अरी, ओ धरती बोल !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
बोल कि तेरी खिदमत की है, बोल कि तेरा काम किया है
बोल कि तेरे फल खाये हैं, बोल कि तेरा दूध पिया है
बोल कि हमने हश्र उठाया, बोल कि हमसे हश्र उठा है
बोल कि हमसे जागी दुनिया
बोल कि हमसे जागी धरती
बोल ! अरी, ओ धरती बोल !
राज सिंहासन डाँवाडोल!
Sunday, July 26, 2015
सैलरी पैंतीस हज़ार है..
जिंदगी दाव पर लगी है मेरी मैं
नौ से पांच ऑफिस जाता हूँ.
ये मेरा एक प्यारा दोस्त है
हमने साथ में थिएटर शुरू किया था,
Wednesday, April 1, 2015
I am an Idiot
1/4/2015
12:27 PM
Do you understand what has happened to me??
They say now that I am an idiot; I say I had never been.
They
came to me, they touched me, I
confronted, they never stopped, I cried, I tried to tell my people to whom I
belonged, They replied “Those are the people who too belong to us” I dint understand that, if everybody who lives with you belongs to
you, how could “He” Touch?? “He” should not touch then...
But
ever after I never tried to tell my people.
I revolted. And by then I kept
revolting till the time I belonged to them.
I used to draw beautiful sceneries before. I used to read
Comic books day and night. Chacha Chawdhery, Sabu and Pinky were my Favorite characters,
I used to Watch Ales and Wonderland, I used to watch Disney. I used to make
paper craft with Glaze, crape and Velvet. I had Fevicol, Scissors and abandoned
wastes material in a big round basket. I used to read all the old books may
father and grandfather accumulated in the almiras with mirrors on their doors.
I used to fly my birds all the day; Day and Night. I use to bunk my school to fly my birds so
many times. .. But now I don’t do all these things, I have no interest left,
Simply I can’t Concentrate.
What I can concentrate is “The Revolt”. Priorities are changed. I have changed. My mind has changed. I have forgotton flying
my bird, she said; I remember, that “I am hiding myself IN, somewhere very-
very deep into your heart and brain, Do Not tell anybody.” And then she slept,
she kept sleeping for a long time, and I
started forgetting her, Now she flutters, after years she flutters.. I can
hear, she is coming out, she is awake, and she wants to fly again....
My little bird, why you had to
sleep for so many years?? Why I had to be an idiot till now????
BRAIN DAMAGE
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