मेरे दिमाग में हर रोज नए ideas आते रहते हैं ..........बेहतरीन और innovative लेकिन मई उन्हें हकीक़त का लिबास नहीं पहना सकता, पैसा कहाँ है......
मेरी सूरत देख रहे हैं आप पहले ये इतनी बदसूरत और बदमिजाज़ नहीं थी .....पहली बार में लोगों को करीब और करीब लाने का हुनर आता था इसे पैर अब करीब आना तो दूर दूर जाने का सिलसिला यूँ बढ़ता जा रहा है कि अताम्विश्वास कि सीढ़ी क एक एक डंडे नीचे से टूटते जाते हैं......... मै था पहले पैर अब गिर रहा हूँ
सपने, मह्त्वाकान्षाएं, जस्बा, मेहनत और सरलता को सान के नीव राखी थी इरादों कि.........पर एक विशेष नस्ल के दीमक ने इसे कब खोखला कर दिया भनक ही न पड़ी.......समय के साथ साथ सपने भी फुसफुसाते गए, इसलिए नहीं कि मेरे अंदर इन्हें पूरा करने का मदद नहीं था बल्कि इसलिए कि ये टाइम ले रहे थे और टाइम के साथ इनकी relevancy ख़तम होती जा रही थी..
कल जिन लोगों पर अट्टहास करती था मै, सोचता था कि गलतियों का पुलिंदा हैं वो सब आज उन पुलिंदे कि एक छोटी सी चिप बन के रह गया हूँ मै
तमाम जिंदगियों के उलझे हुए धागों के सिरे दिख तो रहे हैं, पर उन्हें पकडू कहाँ से ये अंदाज़ा नहीं लग पा रहा है,,,
आप सोच रहे होंगे कि मै कितनी नेगतीवे बातें कर रहा हूँ...."क्या दिन भर कि थकान के बाद हम यही उक्ताऊ बातें सुनने आये हैं " तो खैर मै आपको बता दूँ कि अभी भी थोड़ी सी positivity बाकी है मुझमे......इसलिए मै आपकी ताक्लीग और बेबसी को और नहीं बढ़ाऊंगा.....मतलब आपको और और जादा bore नहीं करूँगा..
"SALARY" ये शब्द चमकदार है...जिसकी लिए आप यहाँ आये भी हैं.....तो आगे का FARMA इसी शब्द के साथ.....
लेकन हाँ एक छोटी सी request है आप सब से ,,,,,,,भले ही आप SALARY के लालच में आये हैं......पैर जब आप अनावश्यक रूप से मुजसे मिल ही लिए हैं तो इंसानियत के नाते मेरा एक काम कर दीजिये........बस एक बार कोशिश कर के मुजे तालश कर मुजे सुंप दीजिये.......मै तो थक गया हूँ कोई सिरा पकड़ में ही नहीं आता अपनी पहचान का............
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