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Monday, June 14, 2010

ये मै हूँ

तुम्हारी बातें किसी मंझे हुए लेखक की तरह हैं, जो की किसी निहायत ही भोले और मासूम इंसान के जज्बातों के अंदर घुस के उसके अंदर के षड़यंत्र को भी निकाल लेता है.....जबकि हम जानते हैं की मासूमियत षड्यंत्रकारी नहीं होती...

3 comments:

  1. (हाल में अँधेरा है केवल एंट्रेंस पर एक छोटी सी लाइट जल रही है..अचानक एक लम्बे कद का व्यक्ति जिसकी आवाज़ भारी है......हाल में प्रवेश करता है ........हद्बदाता हुआ हाल में प्रवेश कर जाता है....दर्शक समाज नहीं पाते की वो main एंट्रेंस से ही एंट्री लेकर आया है.......)

    व्यक्ति :- खून हो गया खून हो गया.......
    दर्शक 1 :- किसका खून हो गया???
    दर्शक 2 :- अबे खून वून छोडो .......पागल हो क्या हैं???........भैया इन्हें बाहर निकालो , और नाटक शुरू करो .........

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  2. (हाल में अँधेरा है केवल एंट्रेंस पर एक छोटी सी लाइट जल रही है..अचानक एक लम्बे कद का व्यक्ति जिसकी आवाज़ भारी है......हाल में प्रवेश करता है ........हद्बदाता हुआ हाल में प्रवेश कर जाता है....दर्शक समाज नहीं पाते की वो main एंट्रेंस से ही एंट्री लेकर आया है.......)

    व्यक्ति :- खून हो गया खून हो गया.......
    दर्शक 1 :- किसका खून हो गया???
    दर्शक 2 :- अबे खून वून छोडो .......पागल हो क्या हैं???........भैया इन्हें बाहर निकालो , और नाटक शुरू करो .........
    (व्यक्ति हांफता जाता है, कुछ बोल नहीं पता स्तब्ध सा बडबडाता रहता है)
    व्यक्ति:- खून हो गया.... खून हो गया
    दर्शक 2 :- बता किसका खून हुआ है तू बता ले फिर हम नाटक देख लें
    व्यक्ति :- बता हूँ बता हूँ ......(हांफती हुई आवाज में )
    (व्यक्ति पूरी तरह मंच पर चढ़ जाता है, spot light उस पर पड़ती है.)
    दर्शक १:- हाँ हाँ पहले तुम इत्मीनान से खड़े हो जाओ फिर बताओ .......
    (नोट :- दर्शक १ व २ नाटक के ही पात्र हैं)

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  3. Judith Shakespeare ka Khoon ho gaya.. :'(..
    par humne ni kiya.. :O

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