माँ ने तिनके चुन- चुन के घोंसला बनाया था जब हम पैदा नहीं हुए थे तब,
फिर उस घोंसले में ही हम पैदा हुए। पर हमारी माँ दूसरी माओं से अलग थी, उसने हमें उड़ना नहीं सिखाया, और कभी घोंसले से बहार भी नहीं जाने दिया। वो बहार जाती और हमारे लिए खाना लाती। जब तक माँ साथ रहती हम बहुत खुश रहते, वो हमें नयी नयी कहानियां सुनाती, बाहर के लोगों के बारे में बताती, पर जब माँ चली जाती तो हम ऊबने लगते, पर बाहर नहीं झांकते, क्योंकि माँ ने एक बार बड़े कौए की कहानी सुनाई थी जो चिड़िया के छोटे बच्चों को निगल जाता है। पर फिर भी हम थे बहुत शैतान, अपनी बोरियत भगाने के लिए नयी नयी कारस्तानियाँ करते, चोंच से चोंच लड़ाते, घोंसले में ही उड़ने की एक्टिंग करते माँ की सुनाई कहानियों के characters की नक़ल भी करते। ऐसे ही हमें एक दिन एक नयी कारस्तानी सूझी हमने घोंसले के अंदर के ही तिनके बटोरना शुरू किया और घोंसले के अंदर एक छोटा सा घोंसला बना लिया जो बहुत अच्छा बन गया। हमें लगा की हमने माँ से भी अच्छा घोंसला बनाया है, हम बहुत खुश हुए माँ ने हमारे घोंसले की बहुत तारीफ की और ये भी कहा कि ये दुनिया का सबसे अच्छा घोंसला है।
और फिर एक दिन माँ मर गयी। हम बहुत रोये। पर कब तक रोते, तो हम चुप हो गए। दुसरे दिन दोपहर भी आधी जा चुकी थी हम सब भूख के मारे बिलबिलाने लगे। फिर सबने मिल के फैसला किया की हम बहार जाएँगे और खाना ढूढेंगे। पर कैसे??बाहर वो काला कौआ जो है, और अगर उससे बच भी गए तो भी कैसे जाएँगे, उड़ना तो हमें आता नहीं है । ये सोचा, और दोपहर भी जाती रही। शाम होने तक लगा की घोंसले में ही दम तोड़ देंगे, सबसे छोटे वाले भाई ने बोला की घोंसले में मरने से अच्छा है कि बहार जाकर मर जाएं, तब जाके सबकी हिम्मत फिर एकजुट हुई और हमने घोंसले से बाहर छलांग लगा दी, ये तो जादू था, सबके पर सन्न से तन गए, हवा में तैरते हुए हम सब नदी किनारे पहुँच गए, माँ ने नदी के बारे में बताया था अपनी कहानियों में, और ये भी कहा था कि कुछ बड़े - बड़े दूसरी प्रजाति की बिना पंख वाले चिडे भी वहां रहते हैं, जो हम जैसे छोटे चिड़ियों के लिए सफ़ेद दाने जैसे माँ हमारे लिए चुन कर लाया करती थी, मिटटी पर डाल देते हैं, हमें वो दाने दिखे उस घोंसले के पास जो हमारे घोंसले से बहुत बहुत बड़ा था और वो दिखने में भी थोडा अलग था। हम सब उन दानों पर फ़ुदक पड़े। हमने जम कर दाने खाये। सबका पेट भर गया था। सब ख़ुशी से चिचक चिचक फुदक रहे थे। फिर अँधेरा होने लगा, सबका डर थोडा बढ़ने लगा, घोंसले की तरफ लौट पड़े, रास्ते में कोई किसी से कुछ न बोला, घोंसले पर पहुँच कर भी बहुत शांति थी, शायद सब यही सोच रहे थे, की माँ ने तो कहा था की हवा छोटे बचों को उड़ा के ले जाती है, वैसी हवा क्यों नहीं मिली, और वो कला कौआ वो कहाँ छिप गया था, और तो और रास्ते में हमने बाया पक्षी का घोंसला भी देखा जो शायद दुनिया का सबसे सुंदर घोंसला था, सबसे ज्यादा तरतीब से बनाया हुआ, उसे देख के हमें अपने बनाये हुए घोंसले पर शर्म आ गयी , और हम सोचने लगे कि माँ ने क्यों कहा था कि हमारा घोंसला दुनिया का सबसे सुन्दर घोंसला है।
आज माँ को गए पूरे दो साल हो गए हैं, हम सारे भाई बहन अपने अपने बच्चों के साथ अपने अपने घोंसलों में रहते हैं। हम सबने अपने बच्चों को थोडा बड़े होते ही उड़ना सिख दिया। मेरा एक पंख ख़राब हो गया है इसलिए मै ज्यादा उड़ नहीं पाता। बच्चे दिन भर बहार रहते हैं और मै अकेले घोंसले में।
अब जाकर मुझे समझ आया की माँ ने हमें उड़ना क्यों नहीं सिखाया। .............
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