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Saturday, January 5, 2013

तुम्हारी याद में

तुम्हारे  अन्दर से  कितनी कहानियां निकलती हैं हर रोज़,
पर मै उन्हें लिख नहीं पाती।
क्यों की लिखते- लिखते कलम गीली हो जाती है और स्याही  बहने लगती है 
आज सुबह से मैंने कितनी कोशिश की कि इस बहती हुई स्याही को
तुम्हारी सफ़ेद शर्ट तक पहुँचने न दूँ 
पर ये बहुत ज़िद्दी  है 
मेरी  उँगलियों  को काला  करते हुए अपना रास्ता  बना कर निकल गयी 
और मै यहाँ तुम्हारी शर्ट पर लगे दाग को देख कर पछता रही हूँ!!! 

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