एक याद कंडे कोठे की
कुछ खुली कुछ बंद पीले पन्नों वाली ये किताब
कुछ पन्ने मुड़े हुए, कुछ कोने टूटे हुए
पुरानी महक, बहती हुई स्याही वाली
हमारे कंडे कोठे के जीने पर बनी, छोटी लकड़ी की मचान पर पड़ी हुई किताब
......................
आज मैंने स्कूल से छुट्टी मारी, लक्ष्मी चाचा बहुत डांटते हैं,
कभी-कभी कंटाप भी लगा देते हैं,
उनके डर से मै पूरा दिन कंडे कोठे के जीने पर छिप कर बैठी रही
तभी मिली मुझे ये पुरानी खुशबु मिली हुई पीले पन्नो वाली टूटे कोनो की कितब।
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