............
इक चींटी गरम - गरम,
खौलती चाय में गिर गयी..
न चिल्लाई, न रोई,
न मैंने न सुनी कोई आवाज़..
यूँ ही हर रोज़ जल जाती हैं,
कुचल जाती हैं,
हज़ारों चीटियाँ.....
गूंगी हैं.........???
आवाज़ नहीं करतीं???
या हम बहरे हैं, सुन नहीं पाते???
(अंकिता)
...............
awesome........... kafi khamoshi se kaha gaya.....
ReplyDeletegood one yar !
ReplyDelete